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लक्ष्मी जी की आरती: जानिए पूरी विधि, कब और कैसे करें

लक्ष्मी जी की आरती: जानिए पूरी विधि, कब और कैसे करें

लक्ष्मी जी की आरती एक शक्तिशाली आध्यात्मिक प्रथा है, जिससे हम देवी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। इस आरती को विधिवत और भक्तिभाव से करने से घर में धन, समृद्धि, और शांति की प्राप्ति होती है। यहां हम लक्ष्मी जी की आरती की पूरी विधि के बारे में जानेंगे:

आरती की तैयारी:

  1. स्थान चयन: आरती के लिए एक शुद्ध स्थान का चयन करें जो पूजा के लिए उपयुक्त हो।
  2. सामग्री संग्रहण: आरती के लिए आवश्यक सामग्री जैसे कि दीपक, कुमकुम, चावल, दूध, घी, फूल, और बेल पत्र संग्रहित करें।

आरती की प्रक्रिया:

  1. सफा-सुथरा होना: पहले अपने आत्मा को शुद्धि देने के लिए शरीर को सफा करें।
  2. दीपक जलाएं: दीपक को घी और बाती के साथ जलाएं और देवी की मूर्ति के सामने रखें।
  3. मंत्र उच्चारण: लक्ष्मी मंत्रों का उच्चारण करें, जैसे कि “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्मयै नमः”।
  4. आरती गाएं: गाये जाने वाली आरती के पंक्तियों को भक्ति भाव से गाएं।

कब और कैसे करें:

  1. समय निर्धारण: आरती सुबह और शाम को की जा सकती है, लेकिन रात्रि को ज्यादा श्रद्धालु होती है।
  2. भक्ति भाव: आरती के समय अपने मन में भक्ति और श्रद्धा के साथ देवी की प्रतिमा के प्रति अपनी भावना को समर्पित करें।
  3. प्रदीप साजगी: आरती के समय घर को सजाएं और सुंदर प्रदीप जलाएं, ताकि आरती का आत्मिक महौल बने।

समापन:

  1. आरती समाप्ति: आरती के समापन के बाद, देवी की मूर्ति की आँखें देखें और अपने जीवन की मंगलकामनाएं मांगें।
  2. प्रसाद बाँटें: पूजा के बाद प्रसाद बाँटें और अपने परिवार और दोस्तों के साथ सांझा करें।

इस प्रकार, लक्ष्मी जी की आरती का अनुसरण करके हम धन, समृद्धि, और शांति की प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

लक्ष्मी जी की आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।

तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।

सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।

जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।

कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।

सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।

खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता।

रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।

उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

लक्ष्मी जी की पूजा करने से क्या फायदा?

लक्ष्मी जी, धन, समृद्धि, और सौभाग्य की देवी हैं। उनकी पूजा का महत्वपूर्ण स्थान हिन्दू धर्म में है, और लोग विशेषकर दीपावली के दिन उन्हें पूजते हैं। इस पूजा के फायदों की चर्चा करते हैं:

1. आर्थिक समृद्धि:

लक्ष्मी जी की पूजा से आर्थिक समृद्धि होती है। उन्हें प्रसन्न करने से व्यापार में वृद्धि होती है और व्यक्ति को धन की प्राप्ति होती है।

2. समृद्धि और सौभाग्य:

लक्ष्मी जी की कृपा से समृद्धि और सौभाग्य बना रहता है। उनकी पूजा से घर में खुशियाँ आती हैं और परिवार के सभी सदस्यों को आनंदित बनाए रखती है।

3. बचत और निवृत्ति:

लक्ष्मी जी की पूजा से धन का अच्छा प्रबंधन होता है, जिससे बचत और निवृत्ति में सहारा मिलता है।

4. आत्मिक शांति:

लक्ष्मी जी की पूजा करने से मन में शांति बनी रहती है। यह आत्मिक सुकून और मानवीय संबंधों में समर्थन प्रदान करता है।

5. कठिनाईयों का निवारण:

लक्ष्मी जी की पूजा से जीवन में आने वाली कठिनाईयों का सामना करना आसान हो जाता है और व्यक्ति उन्हें पार करने के लिए सजग रहता है।

पूजा की विधि:

लक्ष्मी जी की पूजा में श्रद्धा और विशेष ध्यान की आवश्यकता होती है। अच्छे भावनाओं के साथ उनकी पूजा करने से लाभ होता है। धूप, दीप, फल, फूल, और नैवेद्य के साथ लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। इसके बाद, आराधना करते हुए उनके आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।

आम सवाल (FAQs)


प्रश्न 1: लक्ष्मी जी की आरती क्या है?

उत्तर: लक्ष्मी जी की आरती एक आध्यात्मिक प्रथा है, जिसे हम देवी की कृपा और आशीर्वाद के लिए करते हैं। यह एक पूजा विधि है जो धन, समृद्धि, और शांति की प्राप्ति के लिए की जाती है।

प्रश्न 2: लक्ष्मी जी की आरती कब करें?

उत्तर: आरती को सुबह और शाम में किया जा सकता है, लेकिन रात्रि को ज्यादा श्रद्धालु होती है। आरती का समय व्यक्ति की आध्यात्मिक आवश्यकताओं और समयानुसार होना चाहिए।

प्रश्न 3: आरती में कौन-कौन सी सामग्री चाहिए?

उत्तर: आरती के लिए आवश्यक सामग्री में दीपक, कुमकुम, चावल, दूध, घी, फूल, और बेल पत्र शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, भक्ति और श्रद्धा भी महत्वपूर्ण हैं।

प्रश्न 4: आरती का उच्चारण कैसे करें?

उत्तर: आरती का उच्चारण भक्ति भाव से किया जाता है। मंत्रों को ध्यानपूर्वक और सही तरीके से उच्चारित करें, और गाये जाने वाली आरती को सुंदरता से गाएं।

प्रश्न 5: आरती के बाद क्या करें?

उत्तर: आरती के बाद, देवी की मूर्ति की आँखों में देखें और अपनी मंगलकामनाएं मांगें। फिर प्रसाद बाँटें और अपने परिवार और दोस्तों के साथ साझा करें।

प्रश्न 6: लक्ष्मी जी की आरती का क्या महत्व है?

उत्तर: लक्ष्मी जी की आरती का उद्दीपन और उच्चारण करने से व्यक्ति को धन, समृद्धि, और आनंद की प्राप्ति होती है, और उन्हें आध्यात्मिक ऊँचाईयों की प्राप्ति होती है।

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